Forex me Gold Trade Kese Kre: मेरे 10 साल के अनुभव की पूरी गाइड
Forex me Gold Trade Kese Kre: मेरे 10 साल के अनुभव की पूरी गाइड
Hello Traders! आप सभी का आज की इस पोस्ट में स्वागत है। आज के इस लेख में हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं—’Forex me Gold Trade Kese Kre’, और यह पूरी जानकारी मेरे पिछले 10 साल के ट्रेडिंग अनुभव पर आधारित है। अगर आप भी फॉरेक्स मार्केट में रुचि रखते हैं, तो इस पोस्ट के अंत तक हमारे साथ बने रहें। आज हम बिल्कुल बेसिक से शुरुआत करेंगे और यह जानेंगे कि सोने (Gold) का भाव कब बढ़ता है, कब यह गिरता है, ग्लोबल न्यूज़ का इस पर क्या असर पड़ता है और इसमें असल ट्रेडिंग कैसे की जाती है।
यदि आप फॉरेक्स मार्केट में नए हैं या इसमें रुचि रखते हैं, तो हमारे साथ जुड़े रहें। हम आपको बता दें कि हमारी टीम का मुख्य उद्देश्य आप सभी तक स्टॉक और फॉरेक्स मार्केट से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी बेसिक से लेकर एडवांस लेवल तक बिल्कुल मुफ्त (Free) पहुँचाना है।
आज के समय में हर कोई ट्रेडिंग सीखना चाहता है, लेकिन लोग बड़ी-बड़ी फीस देकर ऐसी कोचिंग्स के चक्कर में फंस जाते हैं जहाँ सिर्फ किताबी थ्योरी पढ़ाई जाती है, प्रैक्टिकल नॉलेज का नाम तक नहीं होता। इन कोचिंग्स की फीस इतनी ज्यादा होती है कि एक मिडिल क्लास या नया ट्रेडर उसे अफोर्ड नहीं कर पाता। मजबूरन वे बिना सीखे सीधे मार्केट में उतर जाते हैं और बड़ा लॉस उठा बैठते हैं।
बस इसी समस्या को दूर करने के लिए, हमने यह बीड़ा उठाया है कि मेरे 10 साल के कड़े संघर्ष और अनुभव का पूरा प्रैक्टिकल ज्ञान आप तक बिल्कुल फ्री में पहुँचाया जाए, ताकि आपको पैसे बर्बाद न करने पड़ें।”
फॉरेक्स मार्केट क्या है और ट्रेडर्स इसमें इतनी रुचि क्यों रखते हैं?
इस मार्केट को लोग मुख्य रूप से तीन नामों से जानते हैं—फॉरेक्स मार्केट (Forex Market), फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (Foreign Exchange Market), और FX मार्केट। यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा लिक्विडिटी वाला मार्केट है, जिसमें दुनिया भर की करेंसी ट्रेड होती हैं; जैसे—US Dollar (USD), Indian Rupee (INR), Euro (EUR), British Pound (GBP) और इसके अलावा कई अन्य मुद्राएँ।
लोग इस मार्केट में सबसे ज्यादा रुचि क्यों रखते हैं, इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
24 घंटे और 5 दिन चालू रहना: यह मार्केट हफ्ते में 5 दिन और 24 घंटे ओपन रहता है। यही वजह है कि जो लोग दिन में जॉब या कोई और काम करते हैं, वे अपने ऑफिस या काम से फ्री होकर शाम को या रात में भी आराम से ट्रेड कर लेते हैं।
बड़ी लिक्विडिटी और करोड़ों-अरबों का वॉल्यूम: फॉरेक्स मार्केट में रोजाना ट्रिलियंस डॉलर का ट्रेड होता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट होने के कारण इसमें High Liquidity होती है, जिससे ट्रेडर जब चाहे अपनी पोजीशन को तुरंत काट सकता है (Exit कर सकता है) या नई ट्रेड ले सकता है।
दोनों तरफ से कमाई का मौका: इस मार्केट में ट्रेडर्स दोनों तरफ (Buy और Sell) बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। चूँकि इसमें लिक्विडिटी बहुत तगड़ी होती है, इसलिए मार्केट अपनी एकतरफा चाल बहुत बढ़िया चलता है और ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को अच्छे से होल्ड कर पाते हैं।
लिवरेज (Leverage) की सुविधा: इस मार्केट की सबसे खास बात यह है कि यहाँ ट्रेडर्स को लिवरेज मिल जाता है। इसके कारण कम कैपिटल (छोटी पूंजी) वाले लोग भी आसानी से ट्रेड कर लेते हैं, और उन्हें बहुत ज्यादा या मोटे पैसों की शुरुआती जरूरत नहीं पड़ती।
यही वह मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से आज के ट्रेडर्स की फॉरेक्स ट्रेडिंग में बहुत ज्यादा दिलचस्पी है और वे इसे इतना पसंद करते हैं कि अपने फ्री टाइम में भी आसानी से ट्रेड पंच कर देते हैं।
गोल्ड पर ग्लोबल न्यूज का तगड़ा प्रभाव
जब भी मार्केट में कोई बड़ी न्यूज आती है—जैसे अगर अमेरिका का डॉलर कमजोर हो रहा है, दुनिया में किसी तरह का तनाव (Geopolitical Tension) चल रहा है, या कोई बड़ा आर्थिक डेटा आ रहा है—तो उसका असर सीधे और साफ-साफ गोल्ड पर नजर आता है। जो ट्रेडर्स ‘न्यूज ट्रेडिंग’ के शौकीन हैं, उनके लिए गोल्ड किसी जन्नत से कम नहीं है।
बड़ा मुनाफा कमाने का मौका (High Profit Potential)
हम सभी को पता है कि गोल्ड के अंदर High Liquidity होती है। अगर हमें टेक्निकल एनालिसिस की सही नॉलेज हो और हम सही जगह पर अपनी एंट्री बना लें, तो किसी भी अन्य करेंसी के मुकाबले हम इसमें कई गुना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
सोने से हमारा इमोशनल जुड़ाव
हम सभी के यहाँ शुरू से ही सोने के प्रति एक अलग ही लगाव रहा है। हमारे दादा-परदादा और घर की सभी महिलाएं सोने की शौकीन रही हैं, और हमने बचपन से घर में सोना देखा और पहना भी है। यही वजह है कि हमारा सोने के साथ एक पुराना इमोशनल रिश्ता है। जब लोग फॉरेक्स मार्केट में नए-नए आते हैं, तो उनका नेचुरली झुकाव सबसे पहले गोल्ड की तरफ ही होता है।
गोल्ड ट्रेड करने के लिए बेस्ट टाइम
फॉरेक्स मार्केट 24 घंटे ओपन रहता है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कभी भी ट्रेड कर लो। मार्केट कब भागेगा, यह आपको पता होना बहुत जरूरी होता है और तभी ट्रेड लेना सही रहता है। मार्केट में 4 सबसे बड़े सेशन होते हैं (बाजार खुलने के समय)—सिडनी, टोक्यो, लंदन और न्यूयॉर्क। इसमें गोल्ड के लिए सबसे बेस्ट लंदन और न्यूयॉर्क ही माने जाते हैं, क्योंकि इस समय इसके अंदर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
लंदन सेशन (London Session – दोपहर का समय)
भारत के समय के मुताबिक लंदन का मार्केट दोपहर 12:30 PM या 1:30 PM के लगभग खुलता है। इसके खुलने के बाद ही जो बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशंस और यूरोप के बड़े बैंक्स हैं, वे सभी अपनी पोजीशन बनाने लगते हैं। और गोल्ड अपनी सुस्त चाल छोड़कर मूवमेंट देने लगता है, इसीलिए कई ट्रेडर्स लंदन सेशन में ट्रेड करना ज्यादा पसंद करते हैं।
न्यूयॉर्क सेशन (New York Session – शाम का समय)
यह सेशन ट्रेडर्स के लिए सोने की तरह है। भारत के समय के करीबन 6:00 PM से 10:30 PM के बीच यह अपने पीक पर रहता है, और ज्यादातर बड़े ट्रेडर्स व प्लेयर्स इसी टाइम अपनी भारी-भारी पोजीशन बाय और सेल करते हैं।
यह सेशन इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी टाइम अमेरिका का मार्केट खुलता है और सबसे बड़ा वॉल्यूम आता है। इसके साथ ही अमेरिका के सारे बड़े इन्फ्लेशन डेटा, CPI डेटा या फेडरल रिजर्व की खबरें इसी समय (शाम को) आती हैं। और इसी टाइम गोल्ड इतनी तेज रफ्तार से भागता है कि सभी ट्रेडर्स अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं, और ज्यादातर ट्रेडर्स इसी समय का इंतजार करते हैं।
किस समय ट्रेड करने से बचना चाहिए?
एशियाई सेशन (Asian Session – सुबह का समय)—जब मार्केट ओपन होता है क्योंकि तब सिडनी और टोक्यो मार्केट खुले होते हैं और गोल्ड की चाल बहुत ही धीरे होती है। इस समय मार्केट इतनी सुस्त चाल चलता है कि सभी ट्रेडर्स बोर हो जाते हैं। इस मार्केट में या तो गोल्ड साइडवेज हो जाता है या फिर छोटी-छोटी कैंडल बनाता है और ट्रेडर्स को ट्रैप करता रहता है।
अगर मार्केट में किसी तरह की न्यूज आने वाली है और आपकी पोजीशन लगी हुई है, तो आपको ध्यान रखना चाहिए कि या तो आप एसएल (Stop Loss) लगाकर रखें या फिर जो प्रॉफिट दिखे उसे बुक करें। क्योंकि इस समय में मार्केट दोनों साइड के इतने तेज एसएल हिट करता है कि पोजीशन काटने का भी समय नहीं मिलता है।
मेरा सुझाव:
अगर कोई भी ट्रेडर अपने सेटअप के अनुसार ट्रेड करता है, तो वह सुबह के मार्केट में भी अच्छा मुनाफा निकालकर अपने दूसरे काम कर सकता है। क्योंकि जो प्रो ट्रेडर्स होते हैं, वे सुबह भी अपनी पोजीशन बनाते हैं और मुनाफा कमाते हैं। सुबह की एक खास बात यह भी है कि अगर आपको चार्ट समझना अच्छे से आता है, तो आप देख सकते हैं कि जो सुबह की एंट्री मिलती है, उसमें एसएल छोटे जाते हैं और एकतरफा रैली में आप बने रह सकते हो।
क्या आप भी वही गलती कर रहे हो जो मैंने की थी?
दोस्तों, आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि मैंने कितनी गलतियाँ और किस तरह ट्रेडिंग की थी, ठीक वैसे ही जैसे शायद अभी आप कर रहे होंगे। इन 10 सालों में मैंने खुद में क्या सुधार किया है और कैसे मुझे इन 10 सालों का अनुभव (Experience) मिला है, वही सारा एक्सपीरियंस मैं आज आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ। अगर आप सभी को यह पोस्ट पसंद आए, तो मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।
10 साल पहले मैंने शुरुआत इंडियन मार्केट में ऑप्शन बाइंग से की थी और एक छोटे कैपिटल से, जहाँ मैं ऑप्शन बाय करता था। ज्यादातर सभी ट्रेडर्स निफ्टी और बैंक निफ्टी से ही शुरुआत करते हैं और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, मेरे साथ भी यही हुआ था। मुझे उस समय जब थोड़ा प्रॉफिट होता था, तो मैं खुश हो जाता था और लॉस आते ही दुखी हो जाता था।
हमेशा यही दिमाग में चलता था कि कैसे इस कैपिटल को डबल किया जाए? उसके लिए जहाँ मन करे, वहाँ ट्रेड ले लेता था, और हमेशा लॉस में ही निकलना पड़ता था। क्योंकि मुझे मार्केट की ज्यादा समझ नहीं थी कि मार्केट कैसे रिएक्ट करता है, कैसे मार्केट चलता है? बस इतना पता था कि यहाँ लाल कैंडल बन रही है, यहाँ से गिरेगा, तो पुट (Put) बाय कर लो; यहाँ से ऊपर जाएगा, तो कॉल (Call) बाय कर लो। और इसी चक्कर में काफी दिनों तक फंसा रहा।
ना मुझे चार्ट के बारे में अच्छे से पता था, ना ही ऑप्शंस के बारे में, और ना ही यह पता था कि जो एप्लीकेशन मैं यूज कर रहा हूँ, उसमें ऐसी क्या-क्या चीजें हैं जो मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं। मतलब अगर बात करें स्टॉक मार्केट की, तो यह समझ लो कि मुझे यह भी नहीं पता था कि कैसे स्टॉक होल्ड करते हैं, ईटीएफ (ETF) क्या होता है, आईपीओ (IPO) क्या होता है, स्टॉक मार्केट के बारे में ‘A’ भी नहीं पता था।
पता था तो बस यही कि निफ्टी-बैंकनिफ्टी में ऑप्शन बाइंग करनी है, यहाँ से कॉल बाय करनी है और यहाँ से पुट बाय करनी है। रोज सुबह मार्केट ओपन होते ही मैं ट्रेड करना चालू कर देता था—बिना किसी रूल और बिना किसी साइकोलॉजी के। और मैंने कोई सेटअप भी नहीं बना रखा था, क्योंकि मैं प्राइस एक्शन के बारे में समझता ही नहीं था। मुझे उससे बस इतना ही मतलब था कि यहाँ से लाल कैंडल बन रही है और यहाँ से ग्रीन, और इसी के चक्कर में कई महीनों, कई सालों तक लॉस लेता रहा।
ना ही मुझे यह पता था कि सही एसएल (Stop Loss) कौन सा है और सही टारगेट कौन सा है। कभी कहाँ से पैसे लिए, कभी कहाँ से, लालच मन में हावी होने लगा, लेकिन मुझे फिर भी सही रास्ता नहीं दिखाई दिया। जिसके कारण ज्यादा लॉस हो जाने से मैंने कुछ समय के लिए ट्रेडिंग से दूरी बना ली।
डेमो ट्रेडिंग और सीखने का असली सफर
और फिर मैं पेपर ट्रेडिंग करने लग गया, जिसको हम डेमो ट्रेडिंग बोलते हैं। मैंने प्राइस एक्शन को सही से समझने की कोशिश की, ऑप्शन चेन को समझने की कोशिश की, प्रीमियम क्या होते हैं और यह कैसे रिएक्ट करते हैं? बाइंग और सेलिंग में अंतर क्या है? क्यों बायर को ज्यादा रिस्क है और क्यों सेलर को रिस्क कम है? इन सभी चीजों को मैंने कई सालों तक समझा और बैकटेस्टिंग करता रहा।
मैं अपने खुद के सेटअप पर काम करता रहा, हर ट्रेड का जर्नल मेंटेन करने लगा और मार्केट बंद होने के बाद हर एक एंट्री पर काम करने लगा। तब जाकर समझ में आया कि मैं पिछले इतने सालों से कैसे काम कर रहा था, जिसके कारण मुझे लगातार (Continuous) लॉस आ रहे थे।
फॉरेक्स ट्रेडिंग की शुरुआत
मैंने शुरुआत फॉरेक्स से नहीं की थी, इसका मतलब यह नहीं कि मैं फॉरेक्स के बारे में कुछ नहीं जानता था, बस मैं एक ही मार्केट को सही से समझना चाहता था इसलिए फॉरेक्स से दूर रहा। जैसे ही मुझे सभी चीजें समझ में आने लगीं, तो मैं फॉरेक्स में आ गया। वहाँ मैंने छोटे कैपिटल से शुरुआत की और कम क्वांटिटी से ट्रेड करना स्टार्ट किया। खुद का एक सेटअप बनाया और उसकी बैकटेस्टिंग करता रहा। मैंने अपनी क्वांटिटी तब तक नहीं बढ़ाई, जब तक मैंने अपने सेटअप को और अपनी साइकोलॉजी को मजबूत नहीं कर लिया।
अगर आप सभी को यह जानना है कि मैं किस तरह फॉरेक्स ट्रेडिंग करता हूँ, मेरी साइकोलॉजी क्या है, किस तरह मैं ट्रेड प्लान करता हूँ और कैसे रिस्क मैनेज करता हूँ, तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में बताओ। मैं आप सभी के लिए उससे संबंधित पोस्ट बहुत जल्द लेकर आऊँगा।
और हाँ, यहाँ तक हमारे साथ बने रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद! अगर आप सभी को यह पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें। आज की इस पोस्ट को हम यहीं समाप्त करने जा रहे हैं। अगर आप सभी इस पोस्ट से संबंधित किसी तरह की कोई शिकायत हो, तो हमें नीचे दिए गए कमेंट में जरूर बताएं, हम तुरंत आपके कमेंट का जवाब देंगे।
डिस्क्लेमर:
यह पोस्ट केवल एजुकेशनल परपस (Educational Purpose) के लिए बनाई गई है। हम ना तो कोई सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड हैं और ना ही कोई सलाहकार हैं। हम केवल आप सभी को वही जानकारी दे रहे हैं जिसके लिए हमने 10 सालों से मेहनत की है। स्टॉक मार्केट में रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए किसी भी तरह की एंट्री बनाने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें। किसी भी तरह के नुकसान की ज़िम्मेदारी हमारी नहीं होगी।