15 July Market Analysis: निफ्टी की चाल और मेरी ट्रेडिंग सीख”
15 July Market Analysis: निफ्टी की चाल और मेरी ट्रेडिंग सीख
हेलो ट्रेडर्स, स्वागत है आप सभी का आज की इस पोस्ट में। मैं आशा करता हूँ कि आप सभी ठीक होंगे। आज हम 15 July Market Analysis के बारे में चर्चा करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, यह पोस्ट उसी दिन आ जानी चाहिए थी, लेकिन किसी तकनीकी खराबी के कारण हम इसे समय पर उपलब्ध नहीं करा पाए, जिसके लिए हम तहे दिल से माफ़ी मांगते हैं।
आज हम सीखेंगे कि मार्केट ने 15 जुलाई को किस तरह ट्रैप (Trap) किया, किस तरह बायर्स के स्टॉप-लॉस हिट किए और किस तरह पूरे दिन मार्केट चला। अगर आप सभी को 15 जुलाई के मार्केट की हमारे साथ एनालिसिस करनी है, तो इस पोस्ट के अंत तक हमसे जुड़े रहें। इसमें हम हर छोटी-छोटी चीज़ को समझाने का प्रयास करेंगे।
15 जुलाई का निफ्टी चार्ट एनालिसिस: सपोर्ट, रेजिस्टेंस और लिक्विडिटी स्वैप

हेलो ट्रेडर्स! ऊपर दिए गए चार्ट के माध्यम से हमने 15 जुलाई के मार्केट को एक फॉर्मेट के हिसाब से समझाने का प्रयास किया है। आपका काम यह है कि आप इस चार्ट को ध्यान से समझने की कोशिश करें। इसके अंदर जो सपोर्ट और रेजिस्टेंस हमने लगाए हैं, उन्हें ध्यान से समझें, क्योंकि ज़्यादातर बिगनर्स को यही पता नहीं होता कि कौन सी जगह सही लेवल काम करेगा। नीचे हमने इसे और भी सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया है।
मार्केट को समझने से पहले लेवल्स देखते हैं। 15 जुलाई से पहले एक बार 14 जुलाई का मार्केट देखें। 14 जुलाई को मार्केट गैप-डाउन ओपन हुआ और उसके बाद कंटीन्यूअस बेरिश रहा, लेकिन हमने एक सपोर्ट लेवल लगा रखा था—24,020 का, जिसे मार्केट ब्रेक नहीं कर पाया और 14 जुलाई को मार्केट ने उसी सपोर्ट लेवल पर क्लोजिंग दे दी।
15 July Market Analysis: मार्केट की ओपनिंग कुछ पॉइंट गैप-अप हुई या इसे फ्लैट ओपनिंग भी कह सकते हैं। अब इसे ध्यान से समझें—मार्केट की ओपनिंग उस सपोर्ट लेवल के ऊपर हुई। इसका मतलब यह है कि वह लेवल महत्वपूर्ण है और वहाँ बायर्स के स्टॉप-लॉस लगे पड़े थे। अगर मार्केट नीचे आता, तो बायर्स के स्टॉप-लॉस हिट हो जाते और मार्केट और बेरिश हो जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मार्केट ओपन होते ही इतनी बड़ी बिग-बार ग्रीन कैंडल! क्या मार्केट बुलिश हो गया?
यह सोच सिर्फ उन बिगनर्स की होती है जिन्हें यह नहीं पता कि मार्केट अपनी चाल कैसे चलता है। जहाँ बिगनर्स यह सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी ग्रीन कैंडल बनी है तो मार्केट बुलिश हो गया, वहीं एक प्रो-ट्रेडर इंतज़ार कर रहा होगा कि कब यह मेरे लेवल पर आए और मैं शॉर्ट सेलिंग की एंट्री बनाऊं। क्योंकि उनकी नज़रों में मार्केट का ट्रेंड अभी भी बेरिश है और एक दिन में मार्केट का ट्रेंड नहीं बदल सकता। एक प्रो-ट्रेडर ने वही किया होगा जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार था—वहाँ प्राइस एक्शन को समझकर शॉर्ट सेलिंग की एंट्री बनाई होगी और डे-लो (Day Low) का टारगेट लिया होगा, जो उन्हें मिला भी।
बिगनर की साइकोलॉजी:
जब मार्केट ऊपर के लेवल से गिर रहा होता है, तब तो एंट्री का प्लान नहीं किया होगा। जब गिर चुका होगा, तब सोचा होगा कि अब तो मार्केट ने डे-लो को भी ब्रेक कर दिया, अब तो और नीचे जाएगा। यही सोचकर बीच में एंट्री बनाई होगी और एंट्री बनाते ही मार्केट थोड़ा नीचे जाकर वापस डे-लो के अंदर चला जाता है। फिर ट्रेडर सोचता है, “यह क्या हुआ? इतना अच्छा नीचे जा रहा था, अब ऊपर जाने लगा!” उन्हें यह नहीं पता होता कि ज़्यादातर लेवल्स पर ट्रैपिंग होती है, जिसे हम Liquidity Sweep बोलते हैं, और यहीं पर ज़्यादातर ट्रेडर्स अपना लॉस करवाते हैं।
ट्रेडर को दुख कब होता है?
जब वे पूरे दिन का मार्केट अपनी स्क्रीन पर देखते हैं और उसे समझने की कोशिश करते हैं। तब उन्हें लगता है कि उनकी एंट्री बहुत गलत थी और नुकसान होना तय था। उन्हें एंट्री यहाँ नहीं, बल्कि वहाँ लेनी चाहिए थी। फिर वे पूरे दिन पछताते रहते हैं, लेकिन अगले दिन फिर वही गलती दोहराते हैं और डिसिप्लिन के साथ काम नहीं करते।
अब हम इस पोस्ट को यहीं समाप्त करते हैं। अगर इस पोस्ट से संबंधित कोई शिकायत हो, तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं ताकि हम उस पर चर्चा कर सकें। ऐसी ही और जानकारी के लिए zynivetrade.com वेबसाइट को विजिट करते रहें।
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट सिर्फ एजुकेशनल पर्पस के लिए है। हम न तो SEBI रजिस्टर्ड हैं और न ही कोई सलाहकार। हम सिर्फ वही जानकारी साझा कर रहे हैं जो हमने अपने 10 सालों में सीखी है। हम चाहते हैं कि जो गलतियाँ हमने ट्रेडिंग में कीं, वो आप न करें। धन्यवाद।